Haryana में बड़ा फैसला! चरस बेचने वाले दो आरोपी को 12 साल जेल और 2.40 लाख जुर्माना

Haryana: फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज और स्पेशल जज एनडीपीएस संजीव कुमार की कोर्ट ने हरियाणा के दो आरोपियों को हशिश (चरस) की बिक्री के मामले में 12 साल की कठोर सजा और 2.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यदि जुर्माना नहीं भरा गया, तो अतिरिक्त एक साल की सजा भी भुगतनी होगी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दोषियों ने युवाओं को हशिश बेचकर उन्हें शारीरिक रूप से कमजोर किया और सामाजिक तौर पर हानिकारक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया। इस गंभीर और समाज-विरोधी अपराध के लिए दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
हशिश की बरामदगी का मामला
सहायक जिला सरकारी अभियोजक क्रिमिनल पूजा साह के अनुसार, 24 फरवरी 2021 को भिमताल के तत्कालीन एसएचओ रमेश सिंह बोहरा पुलिसकर्मियों के साथ टीआरएच चौराहे पर चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान मल्लीताल से पैदल आ रहे दो लोगों को रोका गया। उनके बैग की तलाशी लेने पर पुलिस को 1.517 किलो हशिश आरोपी सुमित (पिता राज कवाड़, ग्राम नक्लोई, पोस्ट विघलान, थाना सदर, खड़कड़ा, सोनीपत) और 1.5 किलो हशिश आरोपी आनंद सिंह (पिता चांडुप, निवासी उपरोक्त स्थान) के पास से बरामद हुई। हशिश का वजन पुलिस सर्किल ऑफिसर की मौजूदगी में किया गया और दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच और साक्ष्य
जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट-1985 के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अभियोजक पूजा साह ने मामले को साबित करने के लिए नौ गवाहों और पांच अन्य साक्ष्यों को कोर्ट में पेश किया। अभियोजन पक्ष ने यह दिखाया कि आरोपियों का कार्य केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं बल्कि समाज विरोधी था, क्योंकि उन्होंने न केवल हशिश बेची बल्कि युवाओं को इसके नशे में डुबोकर सामाजिक अस्थिरता बढ़ाई।
कोर्ट का फैसला और सजा
कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों आरोपियों के कृत्य को समाज-विरोधी करार दिया। अदालत ने उन्हें 12 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई और 2.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यदि जुर्माना नहीं भरा गया, तो दोनों को अतिरिक्त एक साल जेल में रहना होगा। कोर्ट के फैसले के बाद दोनों आरोपियों को तुरंत जेल भेज दिया गया और इस सख्त सजा से नशे की रोकथाम और समाज की सुरक्षा के प्रति संदेश देने की कोशिश की गई है।